ग्रामीण भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सतत् विकास की अवधारणा
Abstract
औद्योगिक भारत बनने कि ओर अग्रसर भारत को आज भी कृषि प्रधान एवं श्रम प्रधान देश के रुप में पहचाना जाता है। क्योंकि देश कि आधे से अधिक जनसंख्या कि आजिविका का मुख्य साधन आज भी कृषि कार्य ही है। देश के परम्परागत् ग्राम प्रधान सामाज में पितृ सत्तात्मक व्यवस्था का अधिपत्य वर्तमान में भी विद्यमान है। संवैधानिक व्यवस्था देश में महिलाओं को औपचारिक एवं कानूनी समानता एवं अधिकार कि उपलब्धता एवं उपभोग को सुनिश्चित करता है। लेकिन ग्रामीण अंचल में सामाज में व्यवहारिक स्तर पर अपने इन अधिकारों से अधिकांश महिलाएं अनभिज्ञ है एवं मनोवैज्ञानिक कारणों से अपने अधिकारों का उपभोग नहीं कर पाती हैंै। विश्व समृद्धि, शांति एवं सुरक्षा के अनुकूल विकसित किए गए सतत् विकास लक्ष्यों का साझा कार्यक्रम जीवन के अन्य पहलू के साथ - साथ महिला अधिकार से भी संबधित है। जो कि अग्रलिखित है।
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