बैगा जनजाति में पारंपरिक ज्ञान एवं उनके जीवन शैली का एक भौगोलिक अध्ययन
Keywords:
बैगा जनजाति, पारम्परिक औषधीय ज्ञान, जीवन शैली एवं सामाजिक संरचना, पारम्परिक और वन आधारित व्यवसायAbstract
बैगा जनजाति मध्य भारत विशेषकर मध्य प्रदेश (मंडला, डिंडोरी, बालाघाट), छत्तीसगढ़ और झारखंड में निवास करने वाली एक प्रमुख एवं विशेष पिछड़ी जनजाति है। उन्हें 'प्रकृतिपुत्र' भी कहा जाता है। मध्य प्रदेश की बैगा जनजाति राज्य की एक प्रमुख और विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति है। यह मुख्य रूप से मंडला, डिंडोरी और बालाघाट जिलों में निवास करती हैं जिन्हें 'बैगा चक' भी कहा जाता है। अपनी समृद्ध संस्कृति, पाज्ञान और प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध के लिए जानी जाती है। बैगा जनजाति के लोग वृक्ष की पूजा करते है तथा बूढ़ा देव एवं दूल्हा देव को अपना देवता मानते है। बैगा जनजाति का मुख्या व्यवसाय वनोपज संग्रह, पशुपालन, खेती तथा ओझा का कार्य करना है। बैगा झाड़-फूक एवं जादू-टोना में विश्वास करते है। इनकी वेश-भूषा अत्यंत अल्प होती है। आधुनिकता के दौर में बैगा जनजाति की संस्कृति में भी आधुनिकता का समावेश हो रहा है। बैगा अब सघन वन, कंदराओं तथा शिकार को छोड़ कर मैदानी क्षेत्रों में रहना तथा कृषि कार्य करना प्रारंभ कर रहे है। किन्तु बैगा अपने आप को जंगल का राजा और प्रथम मानव मानते है। इनका मानना है कि इनकी उत्पत्ति ब्रह्मा जी के द्वारा हुई है। इस प्रकार इस शोध पत्र के माध्यम से बैगाओं के पारम्परिक ज्ञान और उनके जीवन शैली से संबाधित अवधारणाओं का ऐतिहासिक एवं भौगोलिक विश्लेषण किया किया गया है।
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